जैसा हम सब जानते हैं कि हमारा भौतिक शरीर पंचतत्व से बना है

  •  जैसे किसी भौतिक संरचना में प्रयुक्त सामग्री गुणवत्ता हीन हो तो वह संरचना अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं होती है वैसे ही आज इस भौतिक शरीर की उत्पत्ति में प्रयुक्त पंच तत्व पंचमहाभूत गुण हीन हो जाने से जीवन की उत्पत्ति के गुण धर्मों में परिवर्तन आ गया है

    जीवन गर्भ में ही संक्रमित हो रहे हैं हमारे ज्ञान की सार्थकता ही नष्ट होती जा रही है हम यही भूलते जा रहे हैं कि आखिर हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है जैसे संक्रमित रोगों से ग्रस्त एक मरीज पूरे समाज में संक्रमण फैला देता है जब तक उस संक्रमणीय बीमारी का रोगाणु नष्ट ना किया जाए वैसे ही पंचतत्व की अशुद्धता से ग्रसित सृजित हो रहे जीवन मानसिक शारीरिक विकृतियों को प्राप्त होते हैं पंचतत्व में विलीन होने के बाद भी वह अशुद्ध वायु तत्व जिन्हें हम प्रेत प्रदूषण कहते हैं बढ़ता जा रहा है

    आज तेरहवीं संस्कार संबंधी जटिलताओं के चलते हम इस वैज्ञानिक वैदिक कर्मकांड व्यवस्था से दूर होते जा रहे हैं जैसा हम जानते हैं कि तेरहवीं संस्कार के माध्यम से पंच महा तत्वों का पंचमहाभूतों में विलय होता है एवं अपनी भौतिक प्रतिपादनों के चलते वह अपने अपने गुण धर्मों के अनुसार पंचमहाभूतो में समाहित हो जाती हैं परंतु स्मृति शेष व संस्कारों से पृथक होने के कारण स्मृति शेष रहने के कारण वायुमंडल में भटक रहे हैं जिन्हें ही हम प्रेत कहते हैं , यह प्रेत कैसे पंचमहाभूत ओं में समाहित हो, प्रेतआत्मा की प्रबलतम जैविक संरचना को प्राप्त हो इन जटिल परिस्थितियों को सरलतम विधि में कैसे नियोजित किया जाए समय काल के अनुरूप कैसे जीवन को निबंधित किया जाए इसी बहुउद्देशीय व्यवस्था की संरचना हेतु विगत  15 वर्षों से प्रयासरत हैं श्री हनुमान जी की कृपा से त्रिगुण मायामई दोषों से बचने हेतु कानपुर नगर में भी श्री हनुमान जी ने अपनी कृपा बरसाते हुए इस पित्र तीर्थ श्री बालाजी धाम की अवधारणा को रूपांतरित किया है जहां विगत 600 वर्ष पूर्व भगवानअग्नेश्वर श्री स्वयंभू विराजमान है समय काल के चलते जीर्णोद्धार होते रहे हैं परंतु श्री हनुमान जी की कृपा से पुनः महा शक्तियों को जीवन की व्यवस्था को सरलतम करने के लिए प्रभु सेवक जगदीश जी के माध्यम से समस्त महा शक्तियों को पुनः स्थापित एवं जागृत करने की सेवा सौंपी जो वह अपने जीवन काल में लगातार करते आ रहे हैं सेवा का ही फल है, आज कानपुर नगर में भौतिक युग में सरलतम साधन में प्राप्त है जिन जैविक व्यवस्थाओं में प्रेत की प्रकृति विकृत हो गई है उनकी प्रकृति को शुद्ध करने हेतु तमाम प्रक्रियाओं श्री बालाजीधाम में चला रहे हैं|

    श्री बालाजी धाम में माता महाकाली जो श्रद्धा पीठ के रूप में विराजमान है ईश्वर प्राप्ति के विश्वास को प्रबल करती हैं बाबा पित्रेश्वर जी व अग्नेश्वर जी महाराज तमाम प्रकार के कुल दोषों व अनुवांशिक रोगों को दूर करते हैं। श्री बालाजी महाराज हमारे सभी गुणों को व्यवस्थित करके शक्ति का प्रसाद देते हैं एवं बटुक भैरव जी (भैरव बाबा) तामसी गुणों से  निवृत्ति के महा साधन है उनकी कृपा से हमारे पंचतत्व तामसिक प्रकृति से शुद्ध होते हैं
     भगवान श्री प्रेतराज जी राजसी गुणों से  निवृत्ति के महासागर हैं।  पंच महा तत्वों में व्याप्त रजोगुण से उत्पन्न विकृतियों को शुद्ध करते हैं। चरणार बिंदु में प्रेम जागृत होता है वह सीताराम जी महाराज के बनाए आदर्शों के पालन कर मानव जीवन को पाने का उद्देश सफल कर पाता है और परमानंद की प्राप्ति होती है।श्री बालाजी महाराज की कृपा प्राप्ति हेतु सरलतम साधन तुलसीदास जी  से उन्होंने पहले से ही लिखवाया है|

     

    कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरीं पारा |

    श्री सीताराम नाम महिमा से ही समाज का उत्थान हर ग्रह की ऊर्जा ओं का निबंधन संभव है अतः इस धाम में आकर अपने पंच महा तत्वों को जागृत करिए व जीवन की प्रबल तम संवेदना ओं को जागृत करके मानव जीवन को सार्थक बनाएं

     जय सीताराम |