जगदीश जी का संक्षिप्त परिचय इस भौतिक समाज में इनका जन्म 16 नवंबर 1981 को हुआ इनके माता-पिता दादी दादा सभी परम ईश्वर भक्त हैं संपूर्ण पारिवारिक पृष्ठभूमि श्री हनुमान जी की कृपा से ही पोषित हैं श्री जगदीश जी के दादाजी स्वर्गीय गंगा प्रसाद जो मूलतः उन्नाव जिले के रहने वाले थे, 1928 में कानपुर आ गए थे पनकी पड़ाव में आकर उन्होंने श्री हनुमान जी पनकी मंदिर में प्रसाद की दुकान आरंभ की जिससे जीवन के भरण-पोषण की व्यवस्थाएं चलने लगी उनके एक पुत्र जिन का स्वर्गवास अल्पायु में ही हो गया और दूसरे पुत्र नंदकिशोर गुप्ता जी जो कि स्वयं हनुमान जी के महा भक्त हैं प्रसाद की व्यवस्था पनकी मंदिर में करके जीवन यापन कर रहे थे उसी क्रम में इनकी शादी हुई श्रीमती किरण गुप्ता उनकी पत्नी भी धार्मिक प्रकृति की होने के कारण यह परिवार ईश्वर की कृपा से पोषित होता रहा नंदकिशोर जी की चार संतानें हुई जो सभी ईश्वर की कृपा से ईश्वर ध्यान में लगी हुई हैं जिनमें इन के सबसे बड़े पुत्र जिनका नाम जगदीश चंद्र बहुत ही धार्मिक प्रकृति एवं शांत प्रकृति के हैं बहुत कोशिश की कि वह ग्रह की जिम्मेदारियों को छोड़कर अध्यात्म की ओर मुड़ जाएं पर समय को कुछ और ही मंजूर था अचानक श्री जगदीश जी का विवाह हनुमान जी की कृपा से हो गया बस यही से जीवन की धुरी ही बदल गई वायु तत्व प्रेत बाधा से ग्रसित होकर या जगह-जगह भटकते रहे तत्पश्चात श्री हनुमान जी ने इन्हें दिखाया कि प्रेत बाधा से ग्रसित लोगों के पास कितनी पीड़ा है इसी क्रम में इनकी प्रसाद की दुकान पर ही श्रीमान संतोष अग्रवाल जी जो परम हनुमानजी के भक्त और उनकी कृपा के पात्र एवं सलेनपुर बालाजी मंदिर के प्रबंधक हैं जिनको जगदीश जी अपने मन ही मन में गुरु मान लिया था, प्रेत बाधा से ग्रसित होकर भटकते भटकते अचानक रात्रि में हनुमान जी ने स्वप्न दिया कि अपनी समस्या का समाधान तुम्हें भी श्री अग्रवाल जी से प्राप्त होगा तुरंत जगदीश जी ने अपने गुरु तुल्य अग्रवाल जी को दूरभाष किया ऊपरी बाधा में मुक्ति का उपाय पूछा तो उन्होंने पित्रदोषों को परेशानी का कारण बताया और मेहंदीपुर जाने का आदेश दिया उनका आदेश पाकर श्री जगदीश जी तुरंत मेहंदीपुर प्रस्थान कर गए और वहां जाते ही सब रहस्य खुल गए श्री बालाजी मेहंदीपुर पहुंचते ही जगदीश जी को यह एहसास हुआ कि वह अपने घर बहुत समय पश्चात वापस आए हैं धीरे-धीरे उन्हें सब याद आने लगा कि कैसे कहां किस प्रकार यह धाम बना किन-किन शक्तियों के प्रभाव से यह स्थान संचालित था परंतु 2009 में वहां स्थित जिन समस्या ग्रस्त लोगों के लिए वह स्थान का निर्माण किया गया था वह अपने लक्ष्य से भटक गया था श्री बालाजी महाराज भैरव जी प्रेतराज जी ने उन्हें आदेश दिया कलिकाल में प्रेत बाधा बहुत तेजी से बढे़गी उसको वश में रखने के लिए जगह-जगह श्री मेहंदीपुर बालाजी की स्थापना एवं गौरक्षण जो पृथ्वी तत्व को पोषित करता है के लिए गोतीर्थ की रूपरेखा तय की उसी आधार पर कलयुग में नाम के प्रभाव से पित्रदोषों को शुद्ध किया जाए किस प्रकार प्रेत बाधाओं का विध्वंस हो जिससे प्रेत पूजा कर रहे लोगों से इन को बचाया जा सके इसकी रूपरेखा एवं जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए 1 वर्ष श्री मेहंदीपुर में रहना पड़ा श्री प्रेतराज जी श्री भैरव जी का आदेश होने के बाद उन्हें नए मेहंदीपुर धाम को बनाने के लिए कानपुर भेज दिया गया परंतु प्रेत शक्तियों तंत्र मंत्र की शक्तियों के चलते यह संभव ना हुआ इसलिए श्री बालाजी महाराज के आदेश से समय रहते उन उर्जाओं को प्रतिष्ठित करने के लिए बांदा शहर नियुक्त कर दिया जो आगे चलकर बालाजी नगर के रूप में विकसित होगा उधर कानपुर में भी बालाजी धाम के विकास की प्रक्रिया धीरे धीरे चलती रही और इस वर्ष श्री बालाजी महाराज की कृपा से होली महोत्सव के माध्यम से समस्त कानपुर को नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचाने के लिए नगर को समर्पित किया जा रहा है और नगर का पहला पित्रतीर्थ जो हनुमान जी की कृपा से हमारे पित्र जनों की तृप्ति वमुक्ति का परमधाम है जहां आगे चलकर श्री सीताराम नाम महामंत्र बैंक हर घर को पित्रदोष से मुक्ति हेतु आरंभ किया जा रहा है|

श्री हरिशंकर गुप्ता

सेवादार

श्रीमती मीना गुप्ता

सेवादार

शोभा गुप्ता

सेवादार

ऋषि कुमार गुप्ता

सेवादार

Jyotsana shukla

Unnao

ज्योति त्रिवेदी

सेवादार

Divyansh

Kanpur

Divya

Kanpur